श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्णकी आज्ञाके अनुसार मयासुरद्वारा सभाभवन बनानेकी तैयारी  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  2.1.12 
यां कृतां नानुकुर्वन्ति मानवा: प्रेक्ष्य विस्मिता:।
मनुष्यलोके सकले तादृशीं कुरु वै सभाम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
'ऐसा भवन बनाओ कि जब वह बन जाए, तो सम्पूर्ण मानव जगत के सभी लोग उसे देखकर आश्चर्यचकित हो जाएँ और कोई भी उसकी नकल न कर सके।॥12॥
 
'Build such a hall that when it is built, all the people of the entire human world will be amazed to see it and no one will be able to imitate it.॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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