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mahabharat 18.7.d2-d3: इस लोक में परमपद प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को उस महाभारत का श्रवण करना चाहिए, जिसमें भगवान विष्णु की दिव्य कथाओं का वर्णन है और जिसमें शुभ श्रुतियों का सार दिया गया है। अष्टादश पुराणों के रचयिता और वेद (ज्ञान) के सागर महात्मा श्री व्यासदेव का यही सिंहनाद है कि 'तुम्हें प्रतिदिन महाभारत का श्रवण करना चाहिए।'   |   mahabharat अध्याय 18.7:   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 7:  »  श्लोक d2-d3
 
 
श्लोक  18.7.d2-d3 
यत्र विष्णुकथा दिव्या: श्रुतयश्च सनातना:।
तत् श्रोतव्यं मनुष्येण परं पदमिहेच्छता॥
श्रूयतां सिंहनादोऽयमृषेस्तस्य महात्मन:।
अष्टादशपुराणानां कर्तुर्वेदमहोदधे:॥
 
 
अनुवाद
इस लोक में परमपद प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को उस महाभारत का श्रवण करना चाहिए, जिसमें भगवान विष्णु की दिव्य कथाओं का वर्णन है और जिसमें शुभ श्रुतियों का सार दिया गया है। अष्टादश पुराणों के रचयिता और वेद (ज्ञान) के सागर महात्मा श्री व्यासदेव का यही सिंहनाद है कि 'तुम्हें प्रतिदिन महाभारत का श्रवण करना चाहिए।'
 
A person who aspires to attain supreme status in this world should listen to that Mahabharata, in which the divine stories of Lord Vishnu are described and in which the essence of the auspicious Shrutis is given. This is the lion's cry of Mahatma Shri Vyasdev, the author of Ashtadash Puranas and the great ocean of Veda (knowledge) that 'You should listen to Mahabharata daily.' ,
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)