Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.7.d14-d15: जो व्यक्ति महाभारत का निरंतर श्रवण या वर्णन करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के पद को प्राप्त करता है। इतना ही नहीं, वह अपने ग्यारह पीढ़ियों तक के सभी पितरों तथा स्वयं को, अपने पुत्र और पत्नी को भी मुक्ति प्रदान करता है। | mahabharat अध्याय 18.7: । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शृणोति श्रावयेद् वापि सततं चैव यो नर:।
सर्वपापविनिर्मुक्तो वैष्णवं पदमाप्नुयात्॥
पितॄनुद्धरते सर्वानेकादशसमुद्भवान्।
आत्मानं ससुतं चैव स्त्रियं च भरतर्षभ॥
अनुवाद
जो व्यक्ति महाभारत का निरंतर श्रवण या वर्णन करता है, वह सभी पापों से मुक्त होकर भगवान विष्णु के पद को प्राप्त करता है। इतना ही नहीं, वह अपने ग्यारह पीढ़ियों तक के सभी पितरों तथा स्वयं को, अपने पुत्र और पत्नी को भी मुक्ति प्रदान करता है।
The person who continuously listens to or narrates the Mahabharata is freed from all sins and attains the position of Vishnu. Not only this, he also liberates all his forefathers of eleven generations and himself along with his son and wife.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥