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mahabharat 18.6.90: महाभारत परम पवित्र ग्रंथ है। इसमें नाना प्रकार की कथाएँ हैं। देवता भी महाभारत का आनन्द लेते हैं। महाभारत परमपद का स्वरूप है। ॥90॥   |   mahabharat अध्याय 18.6:   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 6:  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  18.6.90 
भारतं परमं पुण्यं भारते विविधा: कथा:।
भारतं सेव्यते देवैर्भारतं परमं पदम्॥ ९०॥
 
 
अनुवाद
महाभारत परम पवित्र ग्रंथ है। इसमें नाना प्रकार की कथाएँ हैं। देवता भी महाभारत का आनन्द लेते हैं। महाभारत परमपद का स्वरूप है। ॥90॥
 
Mahabharata is the most sacred book. It contains various kinds of stories. Even the gods enjoy Mahabharata. Mahabharata is the form of Parampad (supreme word). ॥90॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)