| श्री महाभारत » पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व » अध्याय 6: » श्लोक 83 |
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| | | | श्लोक 18.6.83  | वाचको भरतश्रेष्ठ व्यक्ताक्षरपदस्वर:।
भविष्यं श्रावयेद् विद्वान् भारतं भरतर्षभ॥ ८३॥ | | | | | | अनुवाद | | भरतश्रेष्ठ! कथावाचक विद्वान् हो और प्रत्येक अक्षर, शब्द और स्वर का स्पष्ट उच्चारण करते हुए महाभारत अथवा हरिवंश के आगामी पर्व की कथा सुनाए ॥83॥ | | | | Bharatshrestha! The narrator should be a scholar and should narrate the story of Mahabharata or the future festival of Harivansh while pronouncing each letter, word and vowel clearly. 83॥ | | ✨ ai-generated | | |
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