| श्री महाभारत » पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व » अध्याय 6: » श्लोक 82 |
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| | | | श्लोक 18.6.82  | अतिरात्रस्य यज्ञस्य फलं प्राप्नोति मानव:।
प्राप्नुयाच्च क्रतुफलं तथा पर्वणि पर्वणि॥ ८२॥ | | | | | | अनुवाद | | ऐसा करने से रात्रिभर के यज्ञ का फल मिलता है और प्रत्येक उत्सव के अन्त में ब्राह्मण पूजन करने से श्रौत यज्ञ का फल मिलता है ॥82॥ | | | | By doing this, one gets the results of overnight yagya and by worshiping Brahmin at the end of every festival, one gets the results of Shrauta yagya. 82॥ | | ✨ ai-generated | | |
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