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mahabharat 18.6.75-77: इस प्रकार विद्वान् पुरुष को चाहिए कि वह सम्पूर्ण पर्वों की संहिताओं को पूर्ण करके एकाग्रचित्त होकर उन्हें रेशमी वस्त्रों में लपेटकर किसी उत्तम स्थान पर रख दे और स्नान करके शुद्ध होकर श्वेत वस्त्र, पुष्पमाला और आभूषण धारण करे तथा उन संहिताओं और पुस्तकों की अलग-अलग चंदन की माला आदि उपचारों से पूजा करे। पूजा करते समय मन को एकाग्र और शुद्ध रखे। सभी प्रकार के उत्तम भोजन, पेय, बहुमूल्य वस्तुएं और अन्य इच्छित वस्तुएं दान में दे। 75-77॥   |   mahabharat अध्याय 18.6:   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 6:  »  श्लोक 75-77
 
 
श्लोक  18.6.75-77 
समाप्य सर्वा: प्रयत: संहिता: शास्त्रकोविद:।
शुभे देशे निवेश्याथ क्षौमवस्त्राभिसंवृता:॥ ७५॥
शुक्लाम्बरधर: स्रग्वी शुचिर्भूत्वा स्वलंकृत:।
अर्चयेत यथान्यायं गन्धमाल्यै: पृथक् पृथक्॥ ७६॥
संहितापुस्तकान् राजन् प्रयत: सुसमाहित:।
भक्ष्यैर्माल्यैश्च पेयैश्च कामैश्च विविधै: शुभै:॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विद्वान् पुरुष को चाहिए कि वह सम्पूर्ण पर्वों की संहिताओं को पूर्ण करके एकाग्रचित्त होकर उन्हें रेशमी वस्त्रों में लपेटकर किसी उत्तम स्थान पर रख दे और स्नान करके शुद्ध होकर श्वेत वस्त्र, पुष्पमाला और आभूषण धारण करे तथा उन संहिताओं और पुस्तकों की अलग-अलग चंदन की माला आदि उपचारों से पूजा करे। पूजा करते समय मन को एकाग्र और शुद्ध रखे। सभी प्रकार के उत्तम भोजन, पेय, बहुमूल्य वस्तुएं और अन्य इच्छित वस्तुएं दान में दे। 75-77॥
 
In this way, after completing the Samhitas of all the festivals, a man who is a scholar should be concentrated, wrap them in silk clothes and keep them in some good place and purify himself by taking bath, wearing white clothes, flower garland and jewellery, and worship those Samhitas and books separately with remedies like sandalwood garland etc. Keep your mind concentrated and pure during worship. Offer all kinds of good food, drinks, valuables and other desirable things as gifts. 75-77॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)