Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.6.53-54: राजन! भरतश्रेष्ठ! महाभारत की कथा के प्रारम्भ के पश्चात् क्षत्रियों की जाति, देश, सत्य, महानता, धर्म और वृत्ति को जानकर अब मैं उन वस्तुओं का वर्णन करूँगा जिन्हें प्रत्येक उत्सव में ब्राह्मणों को अर्पित करना चाहिए। 53-54॥ | mahabharat अध्याय 18.6: । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अत: परं प्रवक्ष्यामि यानि देयानि भारते।
वाच्यमाने तु विप्रेभ्यो राजन् पर्वणि पर्वणि॥ ५३॥
जातिं देशं च सत्यं च माहात्म्यं भरतर्षभ।
धर्मं वृत्तिं च विज्ञाय क्षत्रियाणां नराधिप॥ ५४॥
अनुवाद
राजन! भरतश्रेष्ठ! महाभारत की कथा के प्रारम्भ के पश्चात् क्षत्रियों की जाति, देश, सत्य, महानता, धर्म और वृत्ति को जानकर अब मैं उन वस्तुओं का वर्णन करूँगा जिन्हें प्रत्येक उत्सव में ब्राह्मणों को अर्पित करना चाहिए। 53-54॥
Rajan! Bharatshrestha! After the beginning of the story of Mahabharata, after knowing the caste, country, truthfulness, greatness, religion and profession of the Kshatriyas, I will now describe the things which should be offered to the Brahmins in every festival. 53-54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥