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mahabharat 18.6.46-47h: इस प्रकार वह अनेक वर्षों तक स्वर्ग में सम्मानपूर्वक निवास करता है। तत्पश्चात् वह इक्कीस हजार वर्षों तक इन्द्र की सुन्दर नगरी में गन्धर्वों के साथ निवास करता है और देवेन्द्र के साथ वहाँ सुख भोगता है।   |   mahabharat अध्याय 18.6:   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 6:  »  श्लोक 46-47h
 
 
श्लोक  18.6.46-47h 
अथ वर्षगणानेवं स्वर्गलोके महीयते।
ततो गन्धर्वसहित: सहस्राण्येकविंशतिम्॥ ४६॥
पुरन्दरपुरे रम्ये शक्रेण सह मोदते।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार वह अनेक वर्षों तक स्वर्ग में सम्मानपूर्वक निवास करता है। तत्पश्चात् वह इक्कीस हजार वर्षों तक इन्द्र की सुन्दर नगरी में गन्धर्वों के साथ निवास करता है और देवेन्द्र के साथ वहाँ सुख भोगता है।
 
In this manner he lives with honour in heaven for many years. Thereafter he lives with the Gandharvas in the beautiful city of Indra for twenty-one thousand years and enjoys the pleasures there along with Devendra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)