Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.6.32-34h: छठे पारण में दुगुना और सातवें पारण में तिगुना फल मिलता है। वह मनुष्य अप्सराओं से युक्त विमान पर बैठकर इच्छानुसार विचरण करता है, कैलाश शिखर के समान प्रकाशित होता है, वैदूर्य मणि की वेदियों से सुशोभित होता है, नाना प्रकार से अलंकृत होता है, रत्नों और प्रवाल मणियों से अलंकृत होता है तथा दूसरे सूर्य के समान समस्त लोकों में विचरण करता है। 32-33 1/2। | mahabharat अध्याय 18.6: । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
छठे पारण में दुगुना और सातवें पारण में तिगुना फल मिलता है। वह मनुष्य अप्सराओं से युक्त विमान पर बैठकर इच्छानुसार विचरण करता है, कैलाश शिखर के समान प्रकाशित होता है, वैदूर्य मणि की वेदियों से सुशोभित होता है, नाना प्रकार से अलंकृत होता है, रत्नों और प्रवाल मणियों से अलंकृत होता है तथा दूसरे सूर्य के समान समस्त लोकों में विचरण करता है। 32-33 1/2।
In the sixth Parana, one gets double the benefit and in the seventh, three times the benefit. That person sits on a plane filled with Apsaras and moving according to his will, shining like the peak of Kailash, decorated with altars of Vaidurya gem, adorned in various ways and decorated with gems and corals and roams in all the worlds like another Sun. 32-33 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥