Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.6.19-20: जो भीतर और बाहर से शुद्ध हो, सुसंस्कारी हो, गुणवान हो, शुद्ध वस्त्र धारण करता हो, इन्द्रियों से युक्त हो, संस्कारों से युक्त हो, सब शास्त्रों का तत्त्वज्ञ हो, श्रद्धावान हो, कुदृष्टि से रहित हो, सुन्दर हो, भाग्यवान हो, मन को वश में रखने वाला हो, सत्यभाषी हो और इन्द्रियों को वश में रखने वाला हो, ऐसे विद्वान पुरुष की दान और मन से प्रशंसा करके उसे वक्ता बनाना चाहिए ॥19-20॥ | mahabharat अध्याय 18.6: । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो भीतर और बाहर से शुद्ध हो, सुसंस्कारी हो, गुणवान हो, शुद्ध वस्त्र धारण करता हो, इन्द्रियों से युक्त हो, संस्कारों से युक्त हो, सब शास्त्रों का तत्त्वज्ञ हो, श्रद्धावान हो, कुदृष्टि से रहित हो, सुन्दर हो, भाग्यवान हो, मन को वश में रखने वाला हो, सत्यभाषी हो और इन्द्रियों को वश में रखने वाला हो, ऐसे विद्वान पुरुष की दान और मन से प्रशंसा करके उसे वक्ता बनाना चाहिए ॥19-20॥
One who is pure from within and outside, well-mannered, virtuous, wears pure clothes, has the senses, is full of sanskaras, is a philosopher of all the scriptures, has faith, is free from evil eyes, is handsome, fortunate, has control over the mind, is truthful and has the senses, such a learned man should be made a speaker by appreciating him with charity and mind. 19-20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥