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mahabharat 18.6.17: कथा को चरणबद्ध तरीके से पूर्ण श्रद्धा से सुनना चाहिए और अंत तक पूरा सुनना चाहिए। जितना हो सके सुनने के लिए तत्पर रहकर अपने मन को प्रसन्न रखें। हृदय में आनंद भर लें और मन में किसी प्रकार का संदेह या वाद-विवाद न रखें।   |   mahabharat अध्याय 18.6:   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 6:  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  18.6.17 
श्रद्धया परया युक्तं क्रमशस्तस्य पारग:।
शक्तित: सुमना हृष्ट: शुश्रूषुरविकल्पक:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
कथा को चरणबद्ध तरीके से पूर्ण श्रद्धा से सुनना चाहिए और अंत तक पूरा सुनना चाहिए। जितना हो सके सुनने के लिए तत्पर रहकर अपने मन को प्रसन्न रखें। हृदय में आनंद भर लें और मन में किसी प्रकार का संदेह या वाद-विवाद न रखें।
 
One should listen to the story step by step with full devotion and listen to it completely till the end. Keep your mind happy by being ready to listen as much as you can. Be filled with joy in your heart and do not have doubts or arguments in your mind.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)