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mahabharat 18.6.105: हे पुरुषोत्तम! महाभारत सुनने के बाद उसके लिए दशांश हवन करना आवश्यक है। हे पुरुषोत्तम! इस प्रकार मैंने ये सब बातें विस्तारपूर्वक आपसे कही हैं॥105॥   |   mahabharat अध्याय 18.6:   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 6:  »  श्लोक 105
 
 
श्लोक  18.6.105 
दशांशश्चैव होमोऽपि कर्तव्योऽत्र नराधिप।
इदं मया तवाग्रे च प्रोक्तं सर्वं नरर्षभ॥ १०५॥
 
 
अनुवाद
हे पुरुषोत्तम! महाभारत सुनने के बाद उसके लिए दशांश हवन करना आवश्यक है। हे पुरुषोत्तम! इस प्रकार मैंने ये सब बातें विस्तारपूर्वक आपसे कही हैं॥105॥
 
O lord of men! After listening to the Mahabharata, it is necessary to perform a tenth of the oblations for it. O best of men! Thus, I have explained all these things to you in detail.॥ 105॥
 
इति श्रीमहाभारते शतसाहस्रॺां संहितायां वैयासिक्यां हरिवंशोक्तभारतश्रवणविधावध्याय: समाप्त:॥
इस प्रकार व्यासनिर्मित श्रीमहाभारत शतसाहस्री संहितामें हरिवंशोक्त भारतश्रवणविधिविषयक अध्याय पूरा हुआ॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)