Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.5.9: राजन! भरतश्रेष्ठ! यह देवताओं का गूढ़ रहस्य है। दिव्य नेत्रों वाले, अत्यन्त तेजस्वी एवं तेजस्वी महर्षि व्यासजी ने इस विषय में जो कहा है, उसे मैं तुमसे कहता हूँ; सुनो- ॥9॥ | mahabharat अध्याय 18.5: भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! भरतश्रेष्ठ! यह देवताओं का गूढ़ रहस्य है। दिव्य नेत्रों वाले, अत्यन्त तेजस्वी एवं तेजस्वी महर्षि व्यासजी ने इस विषय में जो कहा है, उसे मैं तुमसे कहता हूँ; सुनो- ॥9॥
Rajan! Bharatshrestha! This is the deep mystery of the gods. Let me tell you what the divine eyed, very brilliant and glorious sage Vyasji has said regarding this matter; Listen-. 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥