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सौतिरुवाच
इत्युक्त: स तु विप्रर्षिरनुज्ञातो महात्मना।
व्यासेन तस्य नृपतेराख्यातुमुपचक्रमे॥ ७॥
अनुवाद
सौति कहते हैं - राजा जनमेजय का प्रश्न सुनकर ब्रह्मर्षि वैशम्पायन महर्षि व्यास की अनुमति लेकर राजा से इस प्रकार कहने लगे।
Sauti says: On hearing King Janamejaya's question, Brahmarishi Vaishmpayana, taking the permission of the great sage Vyasa, started speaking to the king in this manner. 7.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥