Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.5.66: जो विद्वान श्री कृष्णद्वैपायन द्वारा प्रसिद्ध महाभारत रूपी पंचम वेद का वर्णन करता है, वह अर्थ को प्राप्त करता है। जो एकाग्र होकर इस भारतीय कथा का पाठ करता है, वह परम मोक्ष को प्राप्त करता है। इसमें मुझे कोई संदेह नहीं है। 66॥ | mahabharat अध्याय 18.5: भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कार्ष्णं वेदमिमं विद्वान् श्रावयित्वार्थमश्नुते।
इदं भारतमाख्यानं य: पठेत् सुसमाहित:।
स गच्छेत् परमां सिद्धिमिति मे नास्ति संशय:॥ ६६॥
अनुवाद
जो विद्वान श्री कृष्णद्वैपायन द्वारा प्रसिद्ध महाभारत रूपी पंचम वेद का वर्णन करता है, वह अर्थ को प्राप्त करता है। जो एकाग्र होकर इस भारतीय कथा का पाठ करता है, वह परम मोक्ष को प्राप्त करता है। इसमें मुझे कोई संदेह नहीं है। 66॥
The scholar who narrates the fifth Veda in the form of Mahabharata made famous by Shri Krishnadvaipayana, attains the meaning. One who concentrates and recites this Indian story attains the ultimate attainment of salvation. I have no doubt about this. 66॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥