Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.5.64: महाभारत के इस सार को 'भारत सावित्री' के नाम से जाना जाता है। जो मनुष्य प्रतिदिन प्रातः उठकर इसका पाठ करता है, उसे सम्पूर्ण महाभारत का अध्ययन करने का फल प्राप्त होता है और वह परमपिता परमात्मा को प्राप्त करता है। | mahabharat अध्याय 18.5: भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाभारत के इस सार को 'भारत सावित्री' के नाम से जाना जाता है। जो मनुष्य प्रतिदिन प्रातः उठकर इसका पाठ करता है, उसे सम्पूर्ण महाभारत का अध्ययन करने का फल प्राप्त होता है और वह परमपिता परमात्मा को प्राप्त करता है।
This essence of the Mahabharata is known as 'Bharat Savitri'. One who wakes up every morning and recites it, gets the fruits of studying the entire Mahabharata and attains the Supreme God.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥