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mahabharat 18.5.61: ‘अज्ञानी मनुष्य को प्रतिदिन हजारों सुख के अवसर और सैकड़ों भय के अवसर प्राप्त होते हैं; किन्तु विद्वान् पुरुष के मन पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता ॥ 61॥   |   mahabharat अध्याय 18.5: भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  18.5.61 
हर्षस्थानसहस्राणि भयस्थानशतानि च।
दिवसे दिवसे मूढमाविशन्ति न पण्डितम्॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
‘अज्ञानी मनुष्य को प्रतिदिन हजारों सुख के अवसर और सैकड़ों भय के अवसर प्राप्त होते हैं; किन्तु विद्वान् पुरुष के मन पर उनका कोई प्रभाव नहीं पड़ता ॥ 61॥
 
‘An ignorant person gets thousands of opportunities of joy and hundreds of opportunities of fear every day; but they have no effect on the mind of a learned person.॥ 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)