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श्लोक  18.5.6 
एतदिच्छाम्यहं श्रोतुं प्रोच्यमानं द्विजोत्तम।
तपसा हि प्रदीप्तेन सर्वं त्वमनुपश्यसि॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं आपसे यह बात सुनना चाहता हूँ, क्योंकि आप अपनी घोर तपस्या के कारण सब कुछ देख सकते हैं।
 
O great Brahmin, I wish to hear this matter from you because you can see everything through your intense penance.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)