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mahabharat 18.5.53: सनातन मोक्ष के अवतार भगवान कृष्णद्वैपायन ने धर्म की इच्छा से महाभारत के इस प्रसंग की रचना की है।   |   mahabharat अध्याय 18.5: भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  18.5.53 
अनागतश्च मोक्षश्च कृष्णद्वैपायन: प्रभु:।
संदर्भं भारतस्यास्य कृतवान् धर्मकाम्यया॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
सनातन मोक्ष के अवतार भगवान कृष्णद्वैपायन ने धर्म की इच्छा से महाभारत के इस प्रसंग की रचना की है।
 
Lord Krishnadvaipayana, the embodiment of eternal salvation, has composed this reference to Mahabharata with the desire of religion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)