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mahabharat 18.5.44: रात्रि में स्त्रियों के साथ ब्राह्मण जो पाप करता है, वह प्रातःकाल महाभारत का पाठ करने से नष्ट हो जाता है ॥ 44॥   |   mahabharat अध्याय 18.5: भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  18.5.44 
यद् रात्रौ कुरुते पापं ब्राह्मण: स्त्रीगणैर्वृत:।
महाभारतमाख्याय पूर्वां संध्यां प्रमुच्यते॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
रात्रि में स्त्रियों के साथ ब्राह्मण जो पाप करता है, वह प्रातःकाल महाभारत का पाठ करने से नष्ट हो जाता है ॥ 44॥
 
The sins which a Brahmin commits in the company of women at night are absolved by reciting the Mahabharata in the early morning. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)