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mahabharat 18.5.42: जो मनुष्य श्राद्ध के समय ब्राह्मणों को महाभारत का थोड़ा सा भी अंश सुनाता है, उसके द्वारा अर्पित किया गया अन्न-जल अमर हो जाता है और पितरों को प्राप्त होता है ॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 18.5: भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  18.5.42 
यश्चेदं श्रावयेत् श्राद्धे ब्राह्मणान् पादमन्तत:।
अक्षय्यमन्नपानं वै पितॄंस्तस्योपतिष्ठते॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य श्राद्ध के समय ब्राह्मणों को महाभारत का थोड़ा सा भी अंश सुनाता है, उसके द्वारा अर्पित किया गया अन्न-जल अमर हो जाता है और पितरों को प्राप्त होता है ॥ 42॥
 
One who narrates even a small portion of the Mahabharata to the Brahmins during the Shraddha ceremony, the food and drink offered by him becomes immortal and reaches the ancestors. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)