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mahabharat 18.5.41: जो मनुष्य इस सम्पूर्ण कर्णवेद को एकाग्रचित्त होकर सुनता है, उसके ब्रह्महत्या सहित करोड़ों पाप नष्ट हो जाते हैं ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 18.5: भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  18.5.41 
कार्ष्णं वेदमिमं सर्वं शृणुयाद् य: समाहित:।
ब्रह्महत्यादिपापानां कोटिस्तस्य विनश्यति॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य इस सम्पूर्ण कर्णवेद को एकाग्रचित्त होकर सुनता है, उसके ब्रह्महत्या सहित करोड़ों पाप नष्ट हो जाते हैं ॥ 41॥
 
One who listens to this complete Karna Veda with full concentration, millions of his sins, including the killing of a brahmin, are destroyed. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)