श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 5: भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  18.5.34 
विसर्जयित्वा विप्रांस्तान् राजापि जनमेजय:।
ततस्तक्षशिलाया: स पुनरायाद् गजाह्वयम्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
उन ब्राह्मणों को विदा करके राजा जनमेजय भी तक्षशिला से हस्तिनापुर लौट आये।
 
After bidding farewell to those Brahmins, King Janamejaya also returned from Takshashila to Hastinapur. 34.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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