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mahabharat 18.5.31: सौति बोले: हे ब्राह्मणों! राजा जनमेजय को यज्ञ करने का समय मिलने पर महाभारत का वर्णन सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ।   |   mahabharat अध्याय 18.5: भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  18.5.31 
सौतिरुवाच
एतच्छ्रुत्वा द्विजश्रेष्ठा: स राजा जनमेजय:।
विस्मितोऽभवदत्यर्थं यज्ञकर्मान्तरेष्वथ॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
सौति बोले: हे ब्राह्मणों! राजा जनमेजय को यज्ञ करने का समय मिलने पर महाभारत का वर्णन सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ।
 
Sauti said: O Brahmins! King Janamejaya was very surprised to hear the narration of the Mahabharata during the time when he got time to perform the yajnas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)