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सौतिरुवाच
एतच्छ्रुत्वा द्विजश्रेष्ठा: स राजा जनमेजय:।
विस्मितोऽभवदत्यर्थं यज्ञकर्मान्तरेष्वथ॥ ३१॥
अनुवाद
सौति बोले: हे ब्राह्मणों! राजा जनमेजय को यज्ञ करने का समय मिलने पर महाभारत का वर्णन सुनकर बड़ा आश्चर्य हुआ।
Sauti said: O Brahmins! King Janamejaya was very surprised to hear the narration of the Mahabharata during the time when he got time to perform the yajnas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥