श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 5: भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य  »  श्लोक 18-20h
 
 
श्लोक  18.5.18-20h 
वर्चा नाम महातेजा: सोमपुत्र: प्रतापवान्॥ १८॥
सोऽभिमन्युर्नृसिंहस्य फाल्गुनस्य सुतोऽभवत्।
स युद्ध्वा क्षत्रधर्मेण यथा नान्य: पुमान् क्वचित्॥ १९॥
विवेश सोमं धर्मात्मा कर्मणोऽन्ते महारथ:।
 
 
अनुवाद
चन्द्रमा का अत्यंत प्रतापी पुत्र वर्चा, सिंह-पुरुष अर्जुन का पुत्र हुआ और अभिमन्यु नाम से प्रसिद्ध हुआ। उसने क्षत्रिय-धर्मानुसार ऐसा युद्ध किया, जैसा कोई अन्य पुरुष कभी नहीं कर सकता था। वह धर्मात्मा योद्धा अभिमन्यु अपना कार्य पूरा करके चन्द्रमा में ही प्रवेश कर गया।॥18-19 1/2॥
 
The very glorious and majestic son of the moon, Varcha, became the son of the lion-man Arjuna and became famous by the name of Abhimanyu. He fought such a war according to the kshatriya-dharma, as no other man could ever do. That righteous warrior Abhimanyu, after completing his task, entered the moon itself.॥18-19 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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