Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.5.10-11: कुरुनन्दन! वे महान व्रतधारी, प्राचीन मुनि, पराशरनन्दन व्यासजी, जो सम्पूर्ण कर्मों की गति को जानने वाले, अत्यन्त बुद्धिमान और सर्वज्ञ हैं, मुझसे कहते हैं कि 'वे सब वीर कर्मभोगकर अन्त में अपने मूल स्वरूप को प्राप्त हो गए।' परम तेजस्वी और तेजस्वी भीष्मजी वसुओं के रूप में प्रविष्ट हुए। 10-11॥ | mahabharat अध्याय 18.5: भीष्म आदि वीरोंका अपने-अपने मूलस्वरूपमें मिलना और महाभारतका उपसंहार तथा माहात्म्य । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुरुनन्दन! वे महान व्रतधारी, प्राचीन मुनि, पराशरनन्दन व्यासजी, जो सम्पूर्ण कर्मों की गति को जानने वाले, अत्यन्त बुद्धिमान और सर्वज्ञ हैं, मुझसे कहते हैं कि 'वे सब वीर कर्मभोगकर अन्त में अपने मूल स्वरूप को प्राप्त हो गए।' परम तेजस्वी और तेजस्वी भीष्मजी वसुओं के रूप में प्रविष्ट हुए। 10-11॥
Kurunandan! That great vrat-dhari, ancient sage, Parasharanandan Vyas ji, who knows the dynamics of all actions, has immense intelligence and is omniscient, has told me that 'all those heroes, after the suffering of karma, ultimately returned to their original form. The most brilliant and most radiant Bhishma entered into the form of the Vasus. 10-11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥