श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 4: युधिष्ठिरका दिव्यलोकमें श्रीकृष्ण, अर्जुन आदिका दर्शन करना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  18.4.23 
गुह्यकानां गतिं चापि केचित् प्राप्ता नराधिपा:।
त्यक्त्वा देहं जित: स्वर्ग: पुण्यवाग्बुद्धिकर्मभि:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
कुछ राजा गुह्यकपद को प्राप्त हुए हैं। उन सबने युद्ध में शरीर त्यागकर अपनी शुद्ध वाणी, बुद्धि और कर्मों से स्वर्गलोक पर अधिकार प्राप्त किया है।॥23॥
 
‘Some kings have attained the state of Guhyakas. All of them, after sacrificing their bodies in the war, have attained authority over the heaven through their pure speech, intellect and deeds.’॥ 23॥
 
इति श्रीमहाभारते स्वर्गारोहणपर्वणि द्रौपद्यादिस्वस्वस्थानगमने चतुर्थोेेऽध्याय:॥ ४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्वर्गारोहणपर्वमें द्रौपदी आदिका अपने-अपने स्थानमें गमनविषयक चौथा अध्याय पूरा हुआ॥ ४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)