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mahabharat 18.4.17-18: राजेंद्र! दूसरी ओर, अंधककुल के वृष्णि और सात्यकि, बहादुर स्वामी और अत्यंत शक्तिशाली भोज को देखें। वे साध्यों, विश्वेदेवों और मरुद्गणों में विद्यमान हैं। 17-18॥   |   mahabharat अध्याय 18.4: युधिष्ठिरका दिव्यलोकमें श्रीकृष्ण, अर्जुन आदिका दर्शन करना   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 4: युधिष्ठिरका दिव्यलोकमें श्रीकृष्ण, अर्जुन आदिका दर्शन करना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  18.4.17-18 
साध्यानामथ देवानां विश्वेषां मरुतामपि॥ १७॥
गणेषु पश्य राजेन्द्र वृष्ण्यन्धकमहारथान्।
सात्यकिप्रमुखान् वीरान् भोजांश्चैव महाबलान्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
राजेंद्र! दूसरी ओर, अंधककुल के वृष्णि और सात्यकि, बहादुर स्वामी और अत्यंत शक्तिशाली भोज को देखें। वे साध्यों, विश्वेदेवों और मरुद्गणों में विद्यमान हैं। 17-18॥
 
Rajendra! On the other side, look at Vrishni and Satyaki of Andhakkul, the brave masters and the very powerful Bhojas. He is present among the Sadhyas, Vishvedevas and Marudganas. 17-18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)