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श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 4: युधिष्ठिरका दिव्यलोकमें श्रीकृष्ण, अर्जुन आदिका दर्शन करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  18.4.13 
रत्यर्थं भवतां ह्येषा निर्मिता शूलपाणिना।
द्रुपदस्य कुले जाता भवद्भिश्चोपजीविता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भगवान शंकर ने स्वयं ही तुम्हारी प्रसन्नता के लिए इन्हें प्रकट किया था और ये ही द्रुपद के कुल में जन्म लेकर तुम सब भाइयों के द्वारा कृतार्थ हुई थीं।
 
Lord Shankar himself had manifested her for your happiness and it was she who, after being born in the family of Drupada, was blessed by all of you brothers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)