श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 3: इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्य लोकको जाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  18.3.9-10h 
तत: शक्र: सुरपति: श्रिया परमया युत:॥ ९॥
युधिष्ठिरमुवाचेदं सान्त्वपूर्वमिदं वच:।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उत्तम सौन्दर्य से युक्त भगवान् इन्द्र ने युधिष्ठिर को सान्त्वना देते हुए इस प्रकार कहा ॥9 1/2॥
 
Thereafter, Lord Indra, endowed with excellent beauty, consoled Yudhishthira and said thus. 9 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)