श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 3: इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्य लोकको जाना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  18.3.38 
न सव्यसाची भीमो वा यमौ वा पुरुषर्षभौ।
कर्णो वा सत्यवाक् शूरो नरकार्हाश्चिरं नृप॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! धर्मात्मा अर्जुन, भीमसेन, पुरुषार्थी नकुल-सहदेव अथवा सत्यनिष्ठ वीर कर्ण - इनमें से कोई भी सदा नरक में रहने के योग्य नहीं है।
 
Nareshwar! The faithful Arjuna, Bhimsen, the manly man Nakul-Sahadeva or the truthful brave Karna - none of them are worthy of staying in hell forever.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)