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mahabharat 18.3.37: पिता जी! सभी राजाओं को नरक देखना ही पड़ता है; इसीलिए आपको दो क्षण के लिए यह महान दुःख सहना पड़ा।   |   mahabharat अध्याय 18.3: इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्य लोकको जाना   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  18.3.37 
अवश्यं नरकास्तात द्रष्टव्या: सर्वराजभि:।
ततस्त्वया प्राप्तमिदं मुहूर्तं दु:खमुत्तमम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
पिता जी! सभी राजाओं को नरक देखना ही पड़ता है; इसीलिए आपको दो क्षण के लिए यह महान दुःख सहना पड़ा।
 
Father! All kings must see hell; that is why you have suffered this great misery for two moments.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)