Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 18.3.36: पार्थ! प्रजानाथ! आपके भाई नरक में रहने के योग्य नहीं हैं। आपने उन्हें जिस नरक में कष्ट भोगते देखा, वह देवराज इन्द्र द्वारा रचित एक माया थी। 36.   |   mahabharat अध्याय 18.3: इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्य लोकको जाना   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 3: इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्य लोकको जाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  18.3.36 
न च ते भ्रातर: पार्थ नरकार्हा विशाम्पते।
मायैषा देवराजेन महेन्द्रेण प्रयोजिता॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! प्रजानाथ! आपके भाई नरक में रहने के योग्य नहीं हैं। आपने उन्हें जिस नरक में कष्ट भोगते देखा, वह देवराज इन्द्र द्वारा रचित एक माया थी। 36.
 
Partha! Prajanath! Your brothers are not worthy of staying in hell. The hell you saw them suffering was an illusion created by Devraja Indra. 36.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)