श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 3: इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्य लोकको जाना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  18.3.33 
पूर्वं परीक्षितो हि त्वं प्रश्नाद् द्वैतवने मया।
अरणीसहितस्यार्थे तच्च निस्तीर्णवानसि॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
द्वैतवन में अरणिकष्ठ का अपहरण करने के बाद जब मैंने यक्ष के वेश में तुमसे अनेक प्रश्न पूछे थे, वही तुम्हारी प्रथम परीक्षा थी, उसमें तुम बहुत अच्छी तरह उत्तीर्ण हुए॥ 33॥
 
After kidnapping Aranikashtha in Dwaitvan, when I asked you many questions in the guise of Yaksha, that was your first test. You passed it very well.॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)