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mahabharat 18.3.28: पार्थ! ये तीनों लोकों को पवित्र करने वाली पुण्यमयी देवनाड़ियाँ हैं। राजेन्द्र! इनके जल में गोता लगाने से तुम दिव्य लोकों में जा सकोगे। 28॥   |   mahabharat अध्याय 18.3: इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्य लोकको जाना   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  18.3.28 
एषा देवनदी पुण्या पार्थ त्रैलोक्यपावनी।
आकाशगङ्गा राजेन्द्र तत्राप्लुत्य गमिष्यसि॥ २८॥
 
 
अनुवाद
पार्थ! ये तीनों लोकों को पवित्र करने वाली पुण्यमयी देवनाड़ियाँ हैं। राजेन्द्र! इनके जल में गोता लगाने से तुम दिव्य लोकों में जा सकोगे। 28॥
 
Parth! These are the virtuous Devnadi galaxies that purify the three worlds. Rajendra! By diving in their waters you will be able to go to the divine worlds. 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)