श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 3: इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्य लोकको जाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  18.3.24 
अद्य त्वां देवगन्धर्वा दिव्याश्चाप्सरसो दिवि।
उपसेवन्तु कल्याण्यो विरजोऽम्बरभूषणा:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
‘आज से देवता, गन्धर्व और शुभ दिव्य अप्सराएँ स्वच्छ वस्त्र और आभूषणों से सुसज्जित होकर स्वर्ग में आपकी सेवा करेंगी।॥ 24॥
 
‘From today onwards, the gods, Gandharvas and auspicious celestial nymphs, dressed in clean clothes and ornaments, will serve you in heaven.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)