श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 3: इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्य लोकको जाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  18.3.22 
कृच्छ्रं पूर्वं चानुभूय इत:प्रभृति कौरव।
विहरस्व मया सार्धं गतशोको निरामय:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! पहले दुःख भोगकर अब तुम मेरे साथ रहो और रोग-शोक से रहित होकर स्वतन्त्रतापूर्वक विचरण करो॥ 22॥
 
Kurunandan! Having experienced the pain first, from now on you stay with me and roam freely, free from disease and sorrow.॥ 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)