Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 18.3.19: समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ महाधनुर्धर कर्ण, जिसके लिए आप सदैव कुपित रहते हैं, वह भी परम सिद्धि को प्राप्त हो गया है॥19॥   |   mahabharat अध्याय 18.3: इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्य लोकको जाना   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 3: इन्द्र और धर्मका युधिष्ठिरको सान्त्वना देना तथा युधिष्ठिरका शरीर त्यागकर दिव्य लोकको जाना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  18.3.19 
कर्णश्चैव महेष्वास: सर्वशस्त्रभृतां वर:।
स गत: परमां सिद्धिं यदर्थं परितप्यसे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
समस्त शस्त्रधारियों में श्रेष्ठ महाधनुर्धर कर्ण, जिसके लिए आप सदैव कुपित रहते हैं, वह भी परम सिद्धि को प्राप्त हो गया है॥19॥
 
The great archer Karna, the best among all weapon wielders, for whom you are always annoyed, has also attained the supreme success.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)