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mahabharat 18.2.54: हे मनुष्यों के स्वामी! दूत ने धर्मपुत्र युधिष्ठिर की कही हुई सारी बातें कह सुनाईं और यह भी बताया कि वह क्या करना चाहता है ॥ 54॥   |   mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  18.2.54 
निवेदयामास च तद् धर्मराजचिकीर्षितम्।
यथोक्तं धर्मपुत्रेण सर्वमेव जनाधिप॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! दूत ने धर्मपुत्र युधिष्ठिर की कही हुई सारी बातें कह सुनाईं और यह भी बताया कि वह क्या करना चाहता है ॥ 54॥
 
O lord of men! The messenger told everything that Dharmaputra Yudhishthir had said and also told what he wanted to do. ॥ 54॥
 
इति श्रीमहाभारते स्वर्गारोहणपर्वणि युधिष्ठिरनरकदर्शने द्वितीयोऽध्याय:॥ २॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्वर्गारोहणपर्वमें युधिष्ठिरको नरकका दर्शनविषयक दूसरा अध्याय पूरा हुआ॥ २॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)