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mahabharat 18.2.53: बुद्धिमान पाण्डुपुत्र की यह बात सुनकर वह देवदूत उस स्थान पर गया जहाँ सौ यज्ञ करने वाले देवताओं के राजा इन्द्र विराजमान थे ॥53॥   |   mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  18.2.53 
इत्युक्त: स तदा दूत: पाण्डुपुत्रेण धीमता।
जगाम तत्र यत्रास्ते देवराज: शतक्रतु:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पाण्डुपुत्र की यह बात सुनकर वह देवदूत उस स्थान पर गया जहाँ सौ यज्ञ करने वाले देवताओं के राजा इन्द्र विराजमान थे ॥53॥
 
Hearing this from the wise son of Pandu, the angel went to the place where Indra, the king of gods who performed hundred yagyas, was seated. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)