श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  18.2.47 
सर्वधर्मविद: शूरा: सत्यागमपरायणा:।
क्षत्रधर्मरता: सन्तो यज्वानो भूरिदक्षिणा:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
मेरा भाई सब धर्मों का ज्ञाता, शूरवीर, सत्यवादी और शास्त्रों का पालन करने वाला था। क्षत्रिय धर्म में तत्पर होकर उसने बड़े-बड़े यज्ञ किए और बहुत दक्षिणा दी (फिर भी उसकी ऐसी दुर्गति क्यों हुई)?॥47॥
 
‘My brother was a knower of all religions, valiant, truthful and followed the scriptures. Being devoted to the kshatriya dharma, he performed big yagnas and gave a lot of dakshina (however why did he suffer such a bad fate)?॥ 47॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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