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श्लोक  18.2.46 
महेन्द्र इव लक्ष्मीवानास्ते परमपूजिता:।
कस्येदानीं विकारोऽयं य इमे नरकं गता:॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
यहाँ उनका बहुत सम्मान है और उन्हें महेंद्र जैसी राजसी पत्नी का आशीर्वाद प्राप्त है। मेरे किस कर्म का फल है कि मेरे संबंधी नरक में हैं?
 
He is highly respected here and is blessed with a royal wife like Mahendra. What is the result of my karma that my relatives are in hell?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)