Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.2.43-44: मेरे महान् भाइयों कर्ण, द्रौपदी के पाँचों पुत्रों अथवा स्वयं सुमध्यमा द्रौपदी ने ऐसा कौन-सा पाप किया है कि उन्हें इस दुर्गन्धयुक्त और भयंकर स्थान में रहना पड़ रहा है? मैं नहीं जानता कि इन सभी पुण्यात्मा पुरुषों ने कभी कोई पाप किया था या नहीं॥ 43-44॥ | mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मेरे महान् भाइयों कर्ण, द्रौपदी के पाँचों पुत्रों अथवा स्वयं सुमध्यमा द्रौपदी ने ऐसा कौन-सा पाप किया है कि उन्हें इस दुर्गन्धयुक्त और भयंकर स्थान में रहना पड़ रहा है? मैं नहीं जानता कि इन सभी पुण्यात्मा पुरुषों ने कभी कोई पाप किया था या नहीं॥ 43-44॥
‘What sin did my great brothers, Karna, Draupadi's five sons or even Sumadhyma Draupadi herself commit that they have to live in this foul-smelling and horrifying place? I do not know if all these pious men ever committed any sin.॥ 43-44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥