Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 18.2.42: हे मनुष्यों! उस देश के अनुकूल ये वचन सुनकर राजा युधिष्ठिर मन ही मन विचार करने लगे कि यह देवताओं का कैसा विधान है। | mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना । mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ता वाच: स तदा श्रुत्वा तद्देशसदृशीर्नृप।
ततो विममृशे राजा किं त्विदं दैवकारितम्॥ ४२॥
अनुवाद
हे मनुष्यों! उस देश के अनुकूल ये वचन सुनकर राजा युधिष्ठिर मन ही मन विचार करने लगे कि यह देवताओं का कैसा विधान है।
O lord of men! After listening to these words befitting that country, king Yudhishthira began to ponder within himself that what kind of law of the gods is this. 42.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥