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mahabharat 18.2.37: उन दयनीय प्राणियों की बातें सुनकर, दयालु राजा युधिष्ठिर वहीं खड़े हो गए और अचानक बोल उठे, 'हाय! ये बेचारे बड़े दुःख में हैं।'   |   mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  18.2.37 
तेषां तु वचनं श्रुत्वा दयावान् दीनभाषिणाम्।
अहो कृच्छ्रमिति प्राह तस्थौ स च युधिष्ठिर:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उन दयनीय प्राणियों की बातें सुनकर, दयालु राजा युधिष्ठिर वहीं खड़े हो गए और अचानक बोल उठे, 'हाय! ये बेचारे बड़े दुःख में हैं।'
 
Hearing the words of those pitiful creatures, the compassionate King Yudhishthira stood there. Suddenly he exclaimed, 'Oh! These poor souls are in great pain.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)