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श्लोक  18.2.30 
युधिष्ठिरस्तु निर्विण्णस्तेन गन्धेन मूर्च्छित:।
निवर्तने धृतमना: पर्यावर्तत भारत॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
हे भारतपुत्र! वहाँ की दुर्गन्ध से युधिष्ठिर भयभीत हो गए। वे लगभग मूर्छित होने ही वाले थे। अतः उन्होंने मन ही मन लौटने का निश्चय किया और उसी निश्चय के अनुसार वे लौट आए।
 
O son of Bharat! Yudhishthira was frightened by the foul smell there. He was almost about to faint. So he decided in his mind to return and according to that decision he returned.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)