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mahabharat 18.2.29: महाराज ! देवताओं ने मुझे युधिष्ठिर के थक जाने पर उन्हें वापस लाने को कहा है; इसलिए अब मुझे आपको वापस ले जाना है। यदि आप थक गए हों, तो मेरे साथ आइए।॥29॥   |   mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  18.2.29 
निवर्तितव्यो हि मया तथास्म्युक्तो दिवौकसै:।
यदि श्रान्तोऽसि राजेन्द्र त्वमथागन्तुमर्हसि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
महाराज ! देवताओं ने मुझे युधिष्ठिर के थक जाने पर उन्हें वापस लाने को कहा है; इसलिए अब मुझे आपको वापस ले जाना है। यदि आप थक गए हों, तो मेरे साथ आइए।॥29॥
 
‘Maharaj! The gods have told me to bring Yudhishthira back when he gets tired; therefore, now I have to take you back. If you are tired, come with me.’॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)