श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  18.2.28 
स संनिववृते श्रुत्वा धर्मराजस्य भाषितम्।
देवदूतोऽब्रवीच्चैनमेतावद् गमनं तव॥ २८॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज की यह बात सुनकर देवदूत पीछे मुड़ा और बोला, 'आपको यहाँ तक आना था।' 28.
 
On hearing these words of Dharamraj, the angel turned back and said, 'You had to come till here.' 28.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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