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mahabharat 18.2.26-27: वहाँ दुर्गन्ध का अनुभव होने पर उसने देवदूत से पूछा - 'भाई! इस मार्ग पर हमें और कितना आगे जाना है? और मेरे भाई कहाँ हैं? यह तुम मुझे बताओ। मैं जानना चाहता हूँ कि यह देवताओं का कौन-सा देश है।'॥26-27॥   |   mahabharat अध्याय 18.2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना   ।   mahabharat पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 18: स्वर्गारोहण पर्व  »  अध्याय 2: देवदूतका युधिष्ठिरको नरकका दर्शन कराना तथा भाइयोंका करुण-क्रन्दन सुनकर उनका वहीं रहनेका निश्चय करना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  18.2.26-27 
स तं दुर्गन्धमालक्ष्य देवदूतमुवाच ह।
कियदध्वानमस्माभिर्गन्तव्यमिममीदृशम्॥ २६॥
क्व च ते भ्रातरो मह्यं तन्ममाख्यातुमर्हसि।
देशोऽयं कश्च देवानामेतदिच्छामि वेदितुम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वहाँ दुर्गन्ध का अनुभव होने पर उसने देवदूत से पूछा - 'भाई! इस मार्ग पर हमें और कितना आगे जाना है? और मेरे भाई कहाँ हैं? यह तुम मुझे बताओ। मैं जानना चाहता हूँ कि यह देवताओं का कौन-सा देश है।'॥26-27॥
 
After feeling the foul smell there, he asked the angel - 'Brother! How much further do we have to go on this path? And where are my brothers? You should tell me this. I want to know which country of the gods is this.'॥ 26-27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)